Sunday, 12 March 2017

Holi

होली : -
हिन्दुओं का पवित्र पर्व होली क्या है और क्यों मनाया जाता है ?



💐💐💐 पौराणिक मान्यता इस प्रकार है -

💐 चैत्र कृष्ण प्रतिपदा के दिन धरती पर प्रथम मानव मनु का जन्म हुआ था।
💐 हिन्दू मास के अनुसार होली के दिन से नया संवत प्रारम्भ होता है।
💐 नृसिंह रूप में भगवान इसी दिन प्रकट हुए थे और हिरण्यकश्यप नामक असुर का वध कर भक्त प्रहलाद को दर्शन दिए थे।
💐 त्रेतायुग में विष्णु के 8वें अवतार श्री कृष्ण और राधारानी की होली ने रंगोत्सव में प्रेम का रंग भी चढ़ाया। श्री कृष्ण होली के दिन राधारानी के गांव बरसाने जाकर राधा और गोपियों के साथ होली खेलते थे।
💐 इसी दिन कामदेव का पुनर्जन्म हुआ था।
💐 भगवान श्रीकृष्ण ने इस दिन पूतना नामक राक्षसी का वध किया था।
💐💐 💐 सामाजिक मान्यता

💐 होली बसंत का त्यौहार है और इसके आने पर शरद ऋतु समाप्त हो जाती है । कुछ हिस्सों में इस त्यौहार का सम्बन्ध बसंत की फसल पकने से भी है, किसान अच्छी फसल उत्पन्न होने के हर्ष में होली मानते है । होली को वसंत महोत्सव या काम महोत्सव भी कहते हैं ।

💐 भगवान नृसिंह द्वारा हिरण्यकशिपु का वध 💐

होली के पर्व से अनेक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्ध कहानी है प्रह्लाद की। माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकशिपु नाम का एक अत्यंत दुष्ट एवं बलशाली असुर था। अपने बल के दर्प में वह स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रह्लाद ईश्वर भक्त था । प्रह्लाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकशिपु ने उसे अनेक कठोर दंड दिए, परंतु उसने ईश्वर की भक्ति का मार्ग न छोड़ा। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकशिपु ने आदेश दिया कि होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आग में बैठे। आग में बैठने पर होलिका तो जल गई, पर प्रह्लाद बच गये। ईश्वर भक्त प्रह्लाद की स्मृति में इस दिन होलिका जलाई जाती है।