Thursday, 26 July 2018

रामायण के सात काण्ड मानव की उन्नति के सात सोपान

*रामायण के सात काण्ड मानव की उन्नति के सात सोपान*

*1* *बालकाण्ड –*
 बालक प्रभु को प्रिय है क्योकि उसमेँ छल , कपट , नही होता विद्या , धन एवं प्रतिष्ठा बढने पर भी जो अपना हृदय निर्दोष निर्विकारी बनाये रखता है ,उसी को भगवान प्राप्त होते है। बालक
जैसा निर्दोष निर्विकारी दृष्टि रखने
पर ही राम के स्वरुप को पहचान सकते है। जीवन मेँ सरलता का आगमन संयम एवं ब्रह्मचर्य से होता है।बालक की भाँति अपने
मान अपमान को भूलने से
जीवन मेँ सरलता आती है बालक के समान निर्मोही एवं निर्विकारी बनने पर शरीर अयोध्या बनेगा ।जहाँ युद्ध,वैर ,ईर्ष्या नहीँ है ,वही अयोध्या है

*2* *अयोध्याकाण्ड –*
 यह काण्ड मनुष्य
को निर्विकार बनाता है।जब जीव भक्ति रुपी सरयू नदी के तट पर हमेशा निवास करता है,तभी मनुष्य निर्विकारी बनता है।भक्ति अर्थात् प्रेम ,अयोध्याकाण्ड प्रेम प्रदान करता है । रामका भरत प्रेम , राम का सौतेली माता से प्रेम
आदि ,सब इसी काण्ड मेँ है।राम
की निर्विकारिता इसी मेँ दिखाई  देती है ।अयोध्याकाण्ड का पाठ
करने से परिवार मेँ प्रेम बढता है ।उसके घर मेँ लडाई झगडे नहीँ होते ।उसका घर अयोध्या बनता है ।कलह का मूल कारण धन एवं
प्रतिष्ठा है ।अयोध्याकाण्ड का फल निर्वैरता है ।सबसे पहले
अपने घर की ही सभी प्राणियोँ मेँभगवद् भाव रखना चाहिए।

*3.* *अरण्यकाण्ड –*
 यह निर्वासन प्रदान
करता है ।इसका मनन करने से वासना नष्ट होगी ।बिना अरण्यवास(जंगल) के जीवन मेँ
दिव्यता नहीँ आती ।रामचन्द्र राजा होकर भी सीता के साथ वनवास किया ।वनवास मनुष्य
हृदय को कोमल बनाता है।तप द्वारा ही कामरुपी रावण का बध
होगा । इसमेँ सूपर्णखा(मोह )एवं
शबरी (भक्ति)दोनो ही है।भगवान राम सन्देश देते हैँ कि मोह को त्यागकर भक्ति को अपनाओ ।
*किष्किन्धाकाण्ड –*
जब मनुष्य निर्विकार एवं निर्वैर होगा तभी जीव की ईश्वर से मैत्री होगी ।इसमे सुग्रीव और राम अर्थात् जीव और ईश्वर की मैत्री का वर्णन है।जब जीव सुग्रीव की भाँति हनुमान अर्थात् ब्रह्मचर्य का आश्रय लेगा तभी उसे राम मिलेँगे। जिसका कण्ठ सुन्दर है वही सुग्रीव है।कण्ठ की शोभा आभूषण से नही बल्कि राम नाम का जप करने से है।जिसका कण्ठ सुन्दर है ,उसी की मित्रता राम से होती है किन्तु उसे हनुमान यानी ब्रह्मचर्य की सहायता लेनी पडेगी

*5.* *सुन्दरकाण्ड –*
 जब जीव की मैत्री राम से
हो जाती है तो वह सुन्दर हो जाता है ।इस काण्ड मेँ हनुमान को सीता के दर्शन होते है।सीताजी पराभक्ति है ,जिसका जीवन सुन्दर होता है उसे ही पराभक्ति के दर्शन होते है ।संसार समुद्र पार करने वाले को पराभक्ति सीता के दर्शन होते है ।ब्रह्मचर्य एवं रामनाम का आश्रय लेने वाला संसार सागर को पार करता है ।संसार सागर को पार करते समय
मार्ग मेँ सुरसा बाधा डालने आ जाती है , अच्छे रस ही सुरसा है , नये नये रस की वासना रखने वाली जीभ ही सुरसा है। संसार सागर पार करने की कामना रखने वाले को जीभ को वश मे
रखना होगा ।जहाँ पराभक्ति सीता है वहाँ शोक नही रहता ,जहाँ सीता है वहाँ अशोकवन है।

*6.* *लंकाकाण्ड –*
 जीवन भक्तिपूर्ण होने पर राक्षसो का संहार होता है काम क्रोधादि ही राक्षस हैँ ।जो इन्हेँ मार
सकता है ,वही काल को भी मार सकता है ।जिसे काम मारता है उसे काल भी मारता है ,लंका शब्द के अक्षरो को इधर उधर करने पर होगा कालं ।काल सभी को मारता है किन्तु हनुमान जी काल को भी मार देते हैँ ।क्योँकि वे ब्रह्मचर्य का पालन करते हैँ पराभक्ति का दर्शन करते है ।
*7* *उत्तरकाण्ड –*
 इस काण्ड मेँ काकभुसुण्डि एवं गरुड संवाद को बार बार पढना चाहिए । इसमेँ सब कुछ है ।जब तक राक्षस ,काल का विनाश
नहीँ होगा तब तक उत्तरकाण्ड मे प्रवेश नही मिलेगा ।इसमेँ भक्ति की कथा है । भक्त कौन है ? जो भगवान से एक क्षण भी अलग नही हो सकता वही भक्त है पूर्वार्ध मे जो काम रुपी रावण को मारता है उसी का उत्तरकाण्ड
सुन्दर बनता है ,वृद्धावस्था मे
राज्य करता है ।जब जीवन के पूर्वार्ध मे युवावस्था मे काम
को मारने का प्रयत्न होगा तभी उत्तरार्ध –उत्तरकाण्ड सुधर पायेगा । अतः जीवन को सुधारने का प्रयत्न युवावस्था से ही करना चाहिए  जय राम जी की .... गुरु ब्रह्म गुरु विश्नु गुरु देवो महेश्वरः।

गुरु साक्षात परं ब्रम्ह तस्मै श्री गुरुवे नमः।।

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Saturday, 14 July 2018

जय जगन्नाथ रथयात्रा महा उत्सव




🙏🏻 *जय जगन्नाथ* 🙏🏻

*श्री जगन्नाथ रथयात्रा महा उत्सव*

*आषाढ़ शुक्ल द्वितीया (14 जुलाई, 2018)*

   *श्री पुरुषोत्तम क्षेत्र*

*धाम जगन्नाथपुरी में रथयात्रा महोत्सव है:-*

*ब्रह्माण्ड-पुराण में वर्णन:-*

  "इस दिन जो भगवान के रथ को खींचता है, स्वागत-आरती करता है और उनकी लीला को श्रवण करता है, तो भगवान उसको समस्त पापों से मुक्त करके वैकुण्ठ वास देते हैं ।"

*गर्ग सहिंता में वर्णन:-*

  "कलियुग के आरम्भिक 10,000 वर्षो तक करुणा अवतार भगवान जगन्नाथ जी इस धरती पर रहेंगे और अपने अधीनस्थों पर कृपा करेंगे।"

            *पवित्र कथा:-*

   आज से 5000 वर्ष पूर्व उड़ीसा के राजा इंद्रद्युम्न को भगवान के दर्शन की परम् इच्छा को देखकर भगवान समुद्र में तैरते एक लकड़ी के तने के रूप में प्रकट हुए और उस तने पर अपनी मूर्ति बनाने की प्रेरणा दी ।
     हजारों शिल्पकारों ने विग्रह बनाने का प्रयत्न किया किन्तु वह सब एक छिद्र भी न कर सकें , तब विश्वकर्मा जी रूप बदल कर प्रकट हुए और कहा कि "राजन हम 21 दिनों में आपका उद्देश्य पूर्ण कर देंगे किन्तु हमारे कक्ष में कोई प्रवेश नहीं करेगा ।"
    उत्सुकता और पत्नी के आग्रह पर राजा ने 15 दिन उस कक्ष में बिना अनुमति प्रवेश किया तो भगवान के इस अधूरे रूप को पाकर घोर निराशा और पश्चाताप में विलाप करने लगे ।
    दयनीय स्थिति होने पर एक दिन नारद जी ने प्रकट होकर कहा- "राजन आपको शोक नही करना चाहिए अपितु प्रसन्न होना चाहिए क्योंकि आपके पुरुषार्थ के कारण पृथ्वी वासियों को भगवान के दुर्लभ रूप के दर्शन होंगे ।
   यह रूप भगवान ने द्वारिका-वासियों एवम् ब्रह्मा को दिखाया था जो अब समस्त संसार वासियों के लिए सुलभ रहेगा और प्रमाणिक विग्रह के रूप 10,000 वर्षों तक विराजमान रहेगा"
   तब राजा इंद्रद्युम्न ने विशाल जगन्नाथ मन्दिर बनवाया जो कि वर्तमान समय में भी विराजमान है ।
 *भगवान् जगन्नाथ जी के 🏯रथ🏯 का संक्षिप्त परिचय*
1. *रथ का नाम* -नंदीघोष रथ
2. *कुल काष्ठ खंडो की संख्या* -832
3. *कुल चक्के* -16
4. *रथ की ऊंचाई*- 45 फीट
5. *रथ की लंबाई चौड़ाई* - 34 फ़ीट 6 इंच
6. *रथ के सारथि का नाम* - दारुक
7. *रथ के रक्षक का नाम*- गरुड़
8. *रथ में लगे रस्से का नाम*-  शंखचूड़ नागुनी
9. *पताके का रंग*- त्रैलोक्य मोहिनी
10. *रथ के घोड़ो के नाम* -वराह,गोवर्धन,कृष्णा,गोपीकृष्णा,नृसिंह,राम,नारायण,त्रिविक्रम,हनुमान,रूद्र ।।

*सुभद्रा जी के रथ का संक्षिप्त परिचय*
1. *रथ का नाम* - देवदलन रथ
2. *कुल काष्ठ खंडो की संख्या* -593
3. *कुल चक्के* -12
4. *रथ की ऊँचाई*- 43 फीट
5. *रथ की लंबाई चौड़ाई* -
31 फ़ीट 6 इंच
6. *रथ के सारथि का नाम* -
अर्जुन
7. *रथ के रक्षक नाम*-
जयदुर्गा
8. *रथ में लगे रस्से का नाम*-
स्वर्णचूड़ नागुनी
9. *पताके का रंग*- नदंबिका
10. *रथ के घोड़ों के नाम*- रुचिका,मोचिका, जीत,अपराजिता ।।

*बलभद्र जी के रथ का संक्षिप्त परिचय*

1. *रथ का नाम*-तालध्वज रथ
2. *कुल काष्ठ खण्डों की संख्या* -763
3. *कुल चक्के* -14
4. *रथ की ऊँचाई*- 44 फीट
5. *रथ की लंबाई चौड़ाई* - 33 फ़ीट
6. *रथ के सारथि का नाम* - मातली
7. *रथ के रक्षक का नाम*-वासुदेव
8. *रथ में लगे रस्से का नाम*-  वासुकि नाग
9. *पताके का रंग*- उन्नानी
10. *रथ के घोड़ों के नाम* -तीव्र ,घोर,दीर्घाश्रम,स्वर्ण नाभ ।।

*जगन्नाथ स्वामी नयनपथगामी ।*
*नयनपथगामी भवतु मे ।।🍃🍃🍃*